भारत में अब महंगे स्मार्टफोन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आम हो गए हैं। खासकर Apple के iPhone जैसे प्रीमियम फोन अब EMI के जरिए आसानी से खरीदे जा सकते हैं। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आसान किस्तों के पीछे छिपा असली आर्थिक बोझ अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
क्या EMI पर iPhone खरीदना सच में समझदारी है
आजकल बैंक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म महंगे स्मार्टफोन के लिए आसान EMI विकल्प दे रहे हैं। पहली नजर में यह विकल्प काफी आकर्षक लगता है क्योंकि पूरा पैसा एक साथ देने की जरूरत नहीं होती। हालांकि वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि EMI पर ऐसे प्रोडक्ट खरीदना हमेशा सही फैसला नहीं होता। दरअसल स्मार्टफोन एक तेजी से मूल्य घटने वाली चीज़ depreciating asset है। यानी कुछ महीनों में इसकी कीमत कम हो जाती है, जबकि EMI आपको भविष्य की आय से चुकानी पड़ती है। यहीं से असली आर्थिक सवाल शुरू होता है।
क्या फोन काम के लिए खरीदा जा रहा है या सिर्फ शौक के लिए
फाइनेंशियल प्लानर Abhishek Kumar का कहना है कि किसी भी महंगे गैजेट को खरीदने से पहले उसके उद्देश्य को समझना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति फोन या कंप्यूटर अपने काम, कंटेंट क्रिएशन, या स्किल सीखने के लिए खरीद रहा है, तो एक सीमा तक यह खर्च उचित माना जा सकता है। लेकिन अगर यह सिर्फ दिखावे या छोटी अवधि की इच्छा के लिए है, तो यह लंबे समय में वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है।
EMI लेने से पहले अपनी मौजूदा किस्तों का हिसाब क्यों जरूरी है
आज कई युवा प्रोफेशनल पहले से ही एजुकेशन लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड ईएमआई चुका रहे होते हैं। ऐसे में एक और ईएमआई जोड़ना धीरे-धीरे आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नई ईएमआई से पहले अपना डेट-टू-इनकम रेश्यो जरूर जांचें। सामान्य तौर पर यह अनुपात 40% से कम होना चाहिए। यानी आपकी कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, वरना भविष्य में आर्थिक जोखिम बढ़ सकता है।
iPhone EMI का असली गणित क्या कहता है
मान लीजिए कोई व्यक्ति लगभग ₹1,34,900 कीमत वाला iPhone खरीदता है और उसे 12 महीने की EMI में बदल देता है। ऐसे में हर महीने करीब ₹11,200 के आसपास किस्त बनती है, भले ही इसे no-cost EMI कहा जाए। अगर किसी व्यक्ति की मासिक आय करीब ₹1 लाख है, तो यह EMI उसकी आय का लगभग 11% बनती है। ऐसे मामलों में यह खर्च संभालना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। लेकिन कम आय वाले लोगों के लिए यही EMI भारी पड़ सकती है।
क्या लोग EMI लेते समय सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश खरीदार सिर्फ EMI की छोटी राशि पर ध्यान देते हैं। लेकिन असली समस्या opportunity cost से जुड़ी होती है। यानी वही पैसा अगर निवेश किया जाए तो समय के साथ बढ़ सकता है, जबकि स्मार्टफोन की कीमत समय के साथ कम होती जाती है। इसके अलावा EMI खरीदारी में कई बार processing fee, छूट का नुकसान और भविष्य की loan eligibility जैसे छिपे हुए खर्च भी जुड़े होते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता।
महंगा फोन खरीदने से पहले कौन सा आसान नियम अपनाया जा सकता है
वित्तीय विशेषज्ञ एक सरल नियम बताते हैं जिसे One Month Rule कहा जाता है। इसके अनुसार फोन की कीमत आपकी एक महीने की सैलरी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा एक और व्यावहारिक टेस्ट भी सुझाया जाता है। अगर आपके पास इतना नकद पैसा नहीं है कि आप उसी फोन को दो बार खरीद सकें और फिर भी आपकी emergency savings सुरक्षित रहें, तो शायद वह खरीदारी आपके बजट से बाहर है।
Disclaimer:- इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न reports और वित्तीय विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। स्मार्टफोन खरीदने या EMI लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत आय, खर्च और वित्तीय स्थिति का आकलन जरूर करें।